Sunday, November 25, 2018

क्या यमुना का दम घोंटकर खड़ा है सिग्नेचर ब्रिज: निर्माण का रियलिटी चेक

पहले वज़ीराबाद के पुल पर 4-5 घंटे तक का जाम लगता था, ऐसा लगने लगा था कि ज़िंदगी बर्बाद हो गई है, लेकिन जब से सिग्नेचर ब्रिज बना है, यक़ीन मानिए, अब 10 मिनट में यमुना पार कर लेते हैं.''

कुछ इस अंदाज़ में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बुराड़ी में रहने वाले अमित ने अपनी खुशी का इज़हार किया जब पूर्वी दिल्ली को वज़ीराबाद से जोड़ने वाला यह सिग्नेचर ब्रिज मिला.

यमुना नदी पर बना यह ब्रिज पांच नवंबर से आम लोगों के लिए खोला गया और तब से पूर्वी दिल्ली मानो राहत की सांस ले रही है. लेकिन क्या दिल्लीवालों को मिली ये राहत यमुना नदी का दम घोंटकर दी गई है?

यमुना नदी पर इस ब्रिज के निर्माण से नदी के विलुप्त होने का ख़तरा और बढ़ तो नहीं गया है?

इस सवाल का जवाब पता करने के लिए सिग्नेचर ब्रिज को नापा जाए यानी कि इसके निर्माणकार्य का रियलिटी चेक किया जाए.

एक बात यहां बताना ज़रूरी है कि पहले उत्तरी दिल्ली को उत्तर पूर्वी दिल्ली से जोड़ने वाला एक पतला-सा पुल हुआ करता था- वज़ीराबाद ब्रिज, जिसके कारण कई घंटों तक जाम लगा रहता था और जो वायु प्रदूषण का कारण भी बन गया था.

ऐसे में सिग्नेचर ब्रिज के बनने से केवल यातायात का समाधान नहीं निकला है बल्कि दिल्ली की हवा भी कम ज़हरीली हो सके इसका भी इंतेज़ाम करने की कोशिश की गई है.

लेकिन सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण के दौरान प्रदूषण से मरती यमुना की सुध भी लेने की ज़हमत उठाई गई?

सिग्नेचर ब्रिज पर कपड़े उतारने वाले कौन हैं?
कितनी ज़हरीली है यमुना?

चलिए सबसे पहले ये पता करते हैं कि यमुना में जल प्रदूषण का स्तर कितना है. इसके लिए सी.पी.सी.बी की 2016 की रिपोर्ट पर नज़र डालें तो वज़ीराबाद के पास यमुना के प्रवाह में डी.ओ यानी कि डिज़ॉल्वड ऑक्सीजन जो जलजीवन के लिए ज़रूरी है वह 10.8 है जो पर्यावरण मापदंडों के हिसाब से अच्छी मात्रा मानी जाती है. वहीं ओखला के पास बह रही यमुना सांस लेने को तरस रही है और वहां डी.ओ 1.1 है.

बी.ओ.डी यानी कि बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड. इसकी मात्रा ज़्यादा हो तो जल प्रदूषण ज़्यादा होने के संकेत होते हैं. वज़ीराबाद के पास बी.ओ.डी 9 है जो ख़राब नहीं मानी जाती, वहीं ओखला के पास 2015 में 97 था जबकि 2016 में 67 हुआ.

No comments:

Post a Comment